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श्यामा गौ सेवा संस्थान के प्रयास से विराजे गोबर से निर्मित गणेश


भोपाल। श्यामा गो सेवा संस्थान के अध्यक्ष श्री हरीश बारी ने बताया कि प्लास्टर आफ पेरिस व कैमिकल युक्त गणेश प्रतिमाओं से पर्यावरण को अत्याधिक नुकसान हो रहा है, साथ ही प्रतिमा विर्सजन के समय नदी-तलाब दूषित होते जा रहे है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छ भारत अभियान की भी अवहेलना भी हो रही है। इसलिए संस्थान द्वारा इस वर्ष गाय के गोबर से निर्मित श्री गणेश प्रतिमा बनाने का निर्णय लिया गया था।


उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा गौ माता की रक्षा, हिन्दू सनातन धर्म की रक्षा, पर्यावरण की रक्षा, नदी-तालाब की रक्षा के उद्देष्य को लेकर श्यामा गौ सेवा संस्थान मध्यप्रदेश ने अनुठी पहल की है। इस वर्ष गणेश चतुर्थी महोत्सव के अवसर पर'हर घर गोबर के गणेश अभियान की शुरूआत की गई। संस्थान समय-समय पर गौ माता की रक्षा व संरक्षण, संवर्धन और पूज्य सर्वदेवमयी गौमाता को घर-घर पूजनीय बनाने हेतु विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करती रहती है।


श्री बारी ने बताया कि गोबर से निर्मित गणेष प्रतिमा का पानी के टब में प्रतिमा विर्सजन आसानी से हो जाता है। उसके बाद गोबर युक्त पानी को पेड-पौधों व गमले में सींचने से खाद के रूप में उपयोग हो जाता है। इस कार्य से पूर्णतः पर्यावरण की रक्षा के साथ गाय के गोबर का महत्व बढने से गौ शालाए स्वावलम्बी होगी। गाय आमदनी का माध्यम होगा तो लोग उसे आवारा नही छोडेंगे व कत्लखानें में नही भेजी जायेंगी।


संस्थान के सचिव श्री राजेन्द्र सिंह नेगी ने बताया कि तीन दिवसीय चले इस अभियान में सैकड़ों आमजन ने गाय के शुद्ध गोबर से निर्मित गणेशजी की प्रतिमाओं को खरीदकर अपने घरों में स्थापना की। उन्होंने बताया कि गौमाता द्वारा प्लास्टिक खाने से हो रही गंभीर बीमारी, मौत,उपेक्षा, हत्या, अत्याचार इन सभी को रोकने के लिए यह अभियान चलाया गया था। संस्थान गौमाता को पुनः घर-घर पूज्य बनाने व गाय को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिलवाने का हर सम्भव प्रयास करती रहेगी।