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ध्वनिकारक पटाखों का उपयोग प्रतिबंधित 

ग्वालियर। दीपावली प्रकाश का पर्व है। इस दौरान विभिन्न प्रकार के पटाखों का उपयोग बड़ी मात्रा में किया जाता है। पटाखों के ज्वलनशील एवं ध्वनि कारक होने के कारण परिवेशीय वायु में प्रदूषक तत्वों एवं ध्वनि स्तर में वृद्धि होकर पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके साथ-साथ पटाखों के जलने से कागज के टुकड़े एवं अधजली बारूद बच जाती है तथा इस कचरे के संपर्क में आने वाले पशुओं एवं बच्चों के दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना रहती है। 
प्रदूषण बोर्ड से प्राप्त जानकारी के अनुसार वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार 125 डीबी (एआई) या 145 डीबी (सी) से अधिक ध्वनि स्तर जनक पटाखों का विनिर्माण, विक्रय या उपयोग वर्जित किया गया है। माननीय उच्च्तम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशानुसार रात्रि 10 बजे से प्रात: 6 बजे तक ध्वनिकारक पटाखों का उपयोग पूर्णत: प्रतिबंधित है। 
अत: आम जनता से निवेदन है कि निर्धारित ध्वनि स्तर के पटाखों का ही उपयोग निर्धारित समय में व सीमित मात्रा में करें एवं पटाखों को जलाने के पश्चात उत्पन्न कचरे को घरेलू कचरे के साथ न रखें। पटाखों के जलाने से उत्पन्न कचरे को प्राकृतिक स्त्रोत/पेयजल स्त्रोत के समीप न फेंका जाए। क्योंकि विस्फोटक सामग्री खतरनाक रसायनों से निर्मित होती है। अत: नगर निगम एवं नगर पालिकाओं से यह भी अनुरोध है कि पटाखों से उत्पन्न कचरे को पृथक से संग्रहित करके उसका सुरक्षित निष्पादन सुनिश्चित करें। पर्यावरण संरक्षण तथा प्रदूषण नियंत्रण हेतु आम नागरिकों का सहयोग अपेक्षित है।