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एनएसएस स्वयंसेवकों ने ग्वालियर दुर्ग भ्रमण के दौरान पूछा यह किला कैसे बना

ग्वालियर 5 नवंबर। पर्यटन की दृृष्टि से ग्वालियर महानगर प्रसिद्ध हैं। यहा पर पर्यटन का काफी विषाला क्षेत्र हैं। जो भी व्यक्ति ग्वालियर आता है वह इन सभी को तो नहीं देख सकता, परन्तु हर व्यक्ति की इच्छा होती हैं कि मै सबसे पहले ग्वालियर दुर्ग का भ्रमण करुं। 6 राज्यों के पूर्व गणतंत्र दिवस परेड षिविर में स्वयंसेवक कठिन परिश्रम कर राजपथ की तैयारी कर रहे है। यदि इसमें परेड के साथ ही हम स्वयंसेवकों को ग्वालियर का भ्रमण करा दें तो वह किसी सपने से कम नही होगा और कठिन परिश्रम के बाद भ्रमण करना और भी अच्छा लगेगा। 
6 राज्यों के स्वयंसेवक ग्वालियर भ्रमण पर ग्वालियर किला देखने गये वहा पहुंच कर ऐसा लगा जैसे हम सब लोग इस रियासत के राजा हैं। स्वयंसेवकों के मुंह से यह निकला कि इतनी उंचाई पर इस प्रकार की कारीगरी कर इन पत्थरों को नीचे से ऊपर कैसे लाया गया जिसकी खुबसूरती हजारों वर्ष बाद भी वैसी ही बनी हुई हैं। किले के ऊपर से ग्वालियर शहर को देखकर लोगों ने कहा कि ग्वालियर अदभुत हैं।
ग्वालियर भ्रमण के दौरान किले पर राजा मानसिंह पैलेसे, बारा खंबे का मंदिर, तेली का मंदिर, सांस-बहु का मंदिर, गुरुद्वारा भ्रमण कर उनके इतिहास के बारें मे जाना। ग्वालियर पर्यटन की दृृष्टि से काफी अच्छा हैं। यहा पर हजारों वर्ष पुरानी संग्रहालय में वास्तु कला की धरोहरें देखने को मिली। राजा मानसिंह ने महारानी निन्नी (मृृगनयनी) से विवाह किया तो रानी की एक ही शर्त थी कि मैं पानी अपने ही गांव का पिउंगी, इसी शर्त को स्वीकार कर राजाने रानी के गांव राई से ग्वालियर दुर्ग तक नहर द्वारा पानी की व्यवस्था की जिसे देखकर स्वयंसेवक अचंभीत रह गये।
ग्वालियर किले भ्रमण के उपरान्त ग्वालियर में स्थापित सूर्य मंदिर देखने स्वयंसेवक गये। यह सूर्य मंदिर भारत में कोणार्क उडिसा के बाद दूसरा ग्वालियर में हैं। यहा पे स्वयंसेवकों ने मंदिर की वास्तुकला के बारें मे जाना तथा परिसर का स्वच्छ देख प्रण किया कि हम भी अपने क्षेत्र में स्वच्छता को अपनाऐंगे। बौद्धिक सत्र में अनिल सरोदे, व्यवस्थापक विवेकानन्द नीडम ने स्वयंसेवकों से कहा कि जिंदगी में आगे बढने के लिये अपने मन के अंदर किसी भी प्रकार का अहंकार नहीं होना चाहिए। अहंकारी मनुष्य के जीवन को बेकार कर देता हैं। स्वयंसेवक जीवन में जब भी कोई अवसर प्राप्त हो, उस अवसर को पकडकर अपने जीवन में उतारना चाहिए और आगे बढऩा चाहिए।
भ्रमण के दौरान शिविर संचालक डॉ. अषोक श्रोती, समन्वयक डॉ. रविकान्त अदालतवालें, षिविर सहयोगी राहुल सिंह परिहार, डॉ. मनोज अवस्थी, डॉ. संजय कुमार पाण्डेय, डॉ. मंजु सिंह वीर, दीपेन्द्र उपाध्याय, आकाष अस्थाना, पुनीत बंसल, गोरख खापेकर आदि लोग उपस्थित थे।